मानसून के दौरान संभावित प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए टिहरी प्रशासन ने अपनी तैयारियों को और मजबूत कर दिया है। इसी क्रम में नई टिहरी के क्रीड़ा सभागार में “आपदा जोखिम न्यूनीकरण” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम में आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव विनोद कुमार सुमन और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
कार्यशाला में मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि उत्तराखंड लगातार प्राकृतिक चुनौतियों का सामना करता रहा है, लेकिन बेहतर योजना, आधुनिक संसाधनों और प्रशिक्षित टीमों की बदौलत राज्य ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल ने बताया कि जिले में राहत एवं बचाव कार्यों को तेज और प्रभावी बनाने के लिए सभी आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। जेसीबी मशीनों को जीपीएस के माध्यम से जोड़ा गया है, जिससे जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत घटनास्थल तक पहुंचाया जा सके।
उन्होंने बताया कि गंगा नदी क्षेत्र में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ की टीमें देवप्रयाग और कीर्तिनगर में पहले से तैनात हैं। इसके अलावा दूरस्थ क्षेत्रों में तीन महीने का खाद्यान्न और जरूरी सामग्री पहले ही पहुंचा दी गई है। टिहरी बांध की सुरक्षा व्यवस्था की भी अलग से समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने सभी विभागों से सतर्कता बनाए रखने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने का आह्वान किया। विशेषज्ञों ने भी आपदा जोखिम कम करने के लिए जनजागरूकता और सामुदायिक सहभागिता को बेहद जरूरी बताया।