चमोली जिले में स्थित यूनेस्को की विश्व प्राकृतिक धरोहर नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क में 21 दिनों तक चला दशकीय जैव विविधता अनुश्रवण अभियान-2026 सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। वैज्ञानिकों और वन अधिकारियों की टीम सुरक्षित लौटकर ज्योतिर्मठ पहुंची, जहां लाता गांव के ग्रामीणों ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। अभियान के समापन पर टीम ने मां नंदा देवी मंदिर में पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता के संरक्षण का संकल्प दोहराया।
इस अभियान में भारतीय वन्यजीव संस्थान, जीबी पंत हिमालय पर्यावरण संस्थान, एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय, उत्तराखंड वन विभाग, आईटीबीपी और एसडीआरएफ के विशेषज्ञ शामिल रहे। टीम ने लाता गांव से लेकर सरसों पाताल तक के दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में वनस्पतियों, वन्यजीवों, हिमनदों और बुग्यालों का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन किया।
अभियान के दौरान आधुनिक तकनीकों जैसे कैमरा ट्रैप, ड्रोन, रिमोट सेंसिंग और जीआईएस का उपयोग कर महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाए गए। शोधकर्ताओं ने हिमालयी थार, कस्तूरी मृग, भरल, हिमालयी भालू और कई दुर्लभ पक्षी प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की। वहीं हिम तेंदुए और हिमालयी रेड फॉक्स के अप्रत्यक्ष प्रमाण भी मिले।
वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अध्ययन करते हुए हिमनदों, मोरेन और हिमरेखा में हो रहे परिवर्तनों का भी दस्तावेजीकरण किया। इसके अलावा उच्च हिमालयी बुग्यालों में पाई जाने वाली वनस्पतियों, औषधीय पौधों और प्रदूषण संकेतक लाइकेन प्रजातियों का भी गहन अध्ययन किया गया।
वन विभाग का मानना है कि इस अभियान से प्राप्त आंकड़े भविष्य में हिमालयी जैव विविधता संरक्षण, वन्यजीव प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन पर शोध के लिए बेहद उपयोगी साबित होंगे। साथ ही स्थानीय समुदाय की भागीदारी को बढ़ाकर संरक्षण कार्यों को और मजबूत किया जाएगा।