रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के प्रसिद्ध तुंगनाथ मंदिर के संरक्षण को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। मंदिर की संरचना में झुकाव की पुष्टि के बाद अब इसे आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के जरिए संरक्षित और मजबूत बनाया जाएगा।
इस कार्य की जिम्मेदारी केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI) को दी गई है। विशेषज्ञों की टीम मंदिर की वर्तमान स्थिति का वैज्ञानिक मूल्यांकन कर उपचार की विस्तृत योजना तैयार कर रही है।
संस्थान के विशेषज्ञों का कहना है कि संरक्षण कार्य के दौरान मंदिर की मूल पहचान, प्राचीन वास्तुकला और धार्मिक महत्व को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा। उपचार के लिए आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों और विशेष संरचनात्मक उपायों का उपयोग किया जाएगा।
संरक्षण प्रक्रिया के दौरान मंदिर की संरचना पर लगातार तकनीकी निगरानी रखी जाएगी। विशेषज्ञों का उद्देश्य केवल मौजूदा झुकाव को नियंत्रित करना ही नहीं, बल्कि भविष्य में किसी भी संभावित संरचनात्मक क्षति को रोकना भी है।
करीब एक हजार वर्ष पुराना तुंगनाथ मंदिर देश की महत्वपूर्ण धार्मिक धरोहरों में गिना जाता है। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि यह वैज्ञानिक पहल मंदिर की मजबूती बढ़ाने के साथ इसकी ऐतिहासिक विरासत को भी आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाएगी।