दून बासमती की खेती को मिला नया सहारा, प्रशासन और किसानों की साझेदारी लाई रंग

देहरादून: देहरादून की पारंपरिक दून बासमती को बचाने की मुहिम अब तेजी पकड़ चुकी है। जिला प्रशासन, कृषि विभाग और किसानों के संयुक्त प्रयासों से यह विशेष धान फिर से खेतों में दिखाई देने लगा है। इस वर्ष जिले में 75 हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती की जा रही है।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि दून बासमती को एक मजबूत ब्रांड के रूप में विकसित करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। खेती बढ़ाने के साथ-साथ इसकी गुणवत्ता बनाए रखने और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है।

पिछले वर्ष किसानों से सीधे धान खरीदकर उन्हें उचित मूल्य दिया गया था। इससे किसानों का भरोसा बढ़ा और इस वर्ष अधिक किसानों ने इस खेती को अपनाया। प्रशासन का मानना है कि आने वाले समय में यह अभियान और व्यापक होगा।

विकासनगर में सीड बैंक और टेस्टिंग सुविधा स्थापित होने के बाद किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले बीज मिलेंगे। साथ ही ब्रांडिंग और मार्केटिंग के जरिए दून बासमती को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की योजना है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकारी प्रयास और किसानों का सहयोग इसी तरह जारी रहा तो दून बासमती एक बार फिर देश-विदेश के बाजारों में अपनी खुशबू और गुणवत्ता के दम पर पहचान बना सकती है।

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