चमोली के थराली क्षेत्र में एक गर्भवती महिला की मौत के बाद स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। परिजनों का आरोप है कि यदि समय पर इलाज और विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध होते तो महिला की जान बचाई जा सकती थी। इस घटना ने दूरदराज के पर्वतीय इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर फिर से बहस छेड़ दी है।
जानकारी के अनुसार, सरिता देवी को प्रसव पीड़ा होने पर सोमवार सुबह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली लाया गया था। परिजनों का आरोप है कि कई घंटे तक महिला का समुचित उपचार नहीं हुआ और बाद में उसे उच्च केंद्र के लिए रेफर कर दिया गया।
रेफर किए जाने के बाद 108 एम्बुलेंस से महिला को कर्णप्रयाग अस्पताल ले जाया जा रहा था। इसी दौरान नारायणबगड़ के समीप उसकी तबीयत बिगड़ गई और रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया।
ग्राम प्रधान चमेली देवी ने बताया कि मृतका अपने पीछे दो छोटे बच्चों को छोड़ गई है। इस दुखद घटना से पूरा गांव स्तब्ध है और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों के अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। उनका मानना है कि स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किए बिना ऐसी घटनाओं को रोकना मुश्किल होगा।