रामनगर वन क्षेत्र में दुर्लभ इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल की वापसी को विशेषज्ञ पर्यावरण संरक्षण की बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। करीब 12 साल बाद इस प्रजाति के दिखाई देने से वन विभाग भी उत्साहित है।
टेड़ा गांव में एक ग्रामीण के घर पहुंची इस गिलहरी की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षित रेस्क्यू किया। बाद में इसकी पहचान इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल के रूप में की गई।
यह प्रजाति पेड़ों के बीच ग्लाइड करने की क्षमता के लिए जानी जाती है। इसके शरीर में मौजूद विशेष झिल्ली इसे हवा में संतुलित रहने में मदद करती है। यही कारण है कि इसे उड़ने वाली गिलहरी कहा जाता है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि रामनगर और कॉर्बेट के जंगल अब भी वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास बने हुए हैं।
वन विभाग का कहना है कि गिलहरी पूरी तरह स्वस्थ है और जल्द ही इसे सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा। इसके साथ ही इस रिकॉर्ड को वन्यजीव संरक्षण के दस्तावेजों में शामिल किया जाएगा।